Home देश अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान शहीद (भारत के एक अनमोल रत्न)

अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान शहीद (भारत के एक अनमोल रत्न)

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आज हिंदुस्तान के अज़ीमुश्शान क्रांतिकारी और मुजाहिद ए आज़ादी अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान का यौम ए पैदाइश ((22 अक्टूबर 1900) है.

अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान का शुमार हिन्दुस्तान की जंग ए आज़ादी के सब से असरदार क्रांतिकारियों में होता है. उन्होंने अपनी जुर्अत, हिम्मत और हौसलामदांना कार्रवाई से नौ जवान नस्ल को बहुत मुतासिर किया है.

अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान की तालीम ओ तरबियत शाहजहांपुर के बेहद मज़हबी घराने में हुई. वो अपने छः बहन भाइयों में सब से छोटे थे. उनके वालिद शफ़ीक़ उल्लाह खान शाहजहांपुर के एक इज़्ज़तदार शख्सियत थे और उनके भाई रियासत उल्लाह ख़ान वकील थे.

अशफ़ाक़ उल्लाह 1921 में गांधी जी के असहयोग आंदोलन से मुतासिर हुए और रामप्रसाद बिस्मिल की क़यादत में आज़ादी की जद्दोजहद में लग गए. लेकिन जब 1922 में असहयोग आंदोलन ख़त्म हो गया तो नौजवानों को मायूसी हुई. अशफ़ाक़ उल्लाह भी मायूस हुए.

इसके बाद वो सच्चिद्रं नाथ सान्याल की तंज़ीम हिन्दुस्तान सोशल रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़ गए. ये तंज़ीम हथियारों के बल पर आज़ादी हासिल करने की हामी थी. अपनी जद्दोजहद को आगे बढ़ाने और हथियार बारूद ख़रीदने के पैसे की ज़रुरत थी. लिहाज़ा 8 अगस्त 1925 को एक मीटिंग हुए जिसमें तय हुआ कि ब्रिटिश गवर्नमेंट के पैसे ले जाने वाली ट्रेन को काकोरी में लूट लिया जाए.

9 अगस्त 1925 को अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान, राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, मुकुंदी लाल वगैरह ने ट्रेन लूट ली और सारे क्रांतिकारी फ़रार हो गए.

महज़ एक महीने में अशफ़ाक़ उल्लाह को छोड़ कर सारे क्रांतिकारी गिरफ्तार हुए. अशफ़ाक़ उल्लाह हिन्दुस्तान छोड़ने की फ़िराक़ में थे लेकिन उनके एक बेहद क़ाबिल ए एतबार बचपन के दोस्त ने उन्हें धोखा दिया और मुख़बिरी कर के गिरफ्तार करा दिया.

उन्हें फैजाबाद जेल में रखा गया. अशफ़ाक़ उल्लाह नमाज़ के पाबंद थे और जेल में मुस्तक़िल क़ुरआन की तिलावत करते थे और रमज़ान में रोज़े पाबंदी के साथ रखते थे.

9 दिसंबर 1927 को ये बांका पठान फांसी के फंदे में झूल गया.

हमारी आज़ादी के लिए अपनी जान का नज़राना पेश करने वाले हज़रत अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान शहीद को आज सारा देश ओर रिपब्लिकन हिंदुस्तान सलाम करता है

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